10 अक्टूबर को है सर्वपितृ अमावस्या, जानें श्राद्ध अनुष्ठान का सही समय

Religion: हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस दिन पितरों को तर्पण और पिंडदान करने का आखिरी दिन माना जाता है। यह दिन 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। बता दें इस अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या और महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यदि किसी परिजन की मृत्यु की तिथि याद न हो तो उनका श्राद्ध भी आप सर्वपितृ अमावस्या पर कर सकते हैं। जानिए इस साल यह अमावस्या कब मनाई जाएगी।

 

कब है सर्वपितृ अमावस्या

सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। 

सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध अनुष्ठान समय

कुतुप मूहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 तक

रौहिण मूहूर्त दोपहर 12:31 से 01:18 तक

अपराह्न काल दोपहर 01:18 से 03:37 तक

 

सर्वपितृ अमावस्या क्यों महत्वपूर्ण है

बता दें कि सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है, जिसे सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध हेतु सबसे महत्त्वपूर्ण माना गया है। गरुड़ पुराण के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को अपने किसी पितर की मृत्यु की तिथि न पता हो या व्यक्ति किसी विशेष तिथि पर अपने पितर का श्राद्ध करने में असमर्थ हो, तो वह  सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करके पुण्य पा सकता है। बता दें कि इस अमावस्या को महालय अमावस्या भी कहा जाता है। महालय यानी वह महान तिथि जिसमें सभी पितरों का आवाहन कर उनका एक साथ पूजन किया जा सके।

कहते हैं पितृ पक्ष में पृथ्वीलोक पर आए पितर अमावस्या तिथि को विदा लेते हैं। इसी कारण से इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करता है। इस शुभ तिथि पर ब्राह्मण भोज, वस्त्र दान, तिलदान, जल स्रोतों पर जलदान, दीपदान और गाय को हरा चारा अर्पित करना बेहद पुण्य का काम माना गया है।

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