Earth: पृथ्वी पर पहली जीवित चीजें आज से 4 अरब साल पहले दिखाई दी थी. तब हमारा ग्रह विशाल अंतरिक्ष चट्टानों से टकरा रहा था, लेकिन जीवन फिर भी कायम रहा. पृथ्वी ने अपने इतिहास में हर तरह की प्रलय देखी है. यहां जीवन काफी लचीला रहा है.
अलग-अलग तरह की प्रलय जैसे सुपरनोवा विस्फोटों और एस्टेरॉयड का पृथ्वी से टकराना व ज्वालामुखी विस्फोट के चलते पृथ्वी की जलवायु में अचानक परिवर्तन आया, जिससे यहां अधिकांश प्रजातियां समाप्त हो गई. रिपोर्ट में बताया गया कि फिर भी जीवन हमेशा पलटाव करता रहा है. नई प्रजातियां उभरती हैं और यह चक्र दोहराता है.
100 साल बाद जलवायु में परिवर्तन
आज से 100 साल बाद यानी साल 2125 में धरती कैसी दिखेगी, इसे लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं. जलवायु परिवर्तन पर हुए कई बड़े अध्ययनों में जो तस्वीर सामने आई है, वह डराने वाली है. साल 2100 तक धरती का औसत तापमान करीब 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. कुछ मॉडल तो यह भी बता रहे हैं कि हालात न सुधरे तो यह बढ़ोतरी 5 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकती है.
समुद्र का जलस्तर
तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और बर्फ की चट्टानें तेजी से पिघल रही हैं, जिससे समुद्र का जलस्तर लगातार ऊपर उट रहा है. जिससे कई बड़े शहरों के निचले इलाके अगली सदी तक पानी में डूब सकते हैं. एशिया के तटीय इलाकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई गई है, जहां करोड़ों लोग समुद्र किनारे रहते हैं.
जीव-जंतुओं और पर्यावरण पर असर
तापमान और मौसम में हो रहे बदलावों का सीधा असर धरती पर मौजूद जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर भी पड़ेगा. कई रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो धरती पर मौजूद करीब एक चौथाई पशु-पक्षी और वनस्पतियां विलुप्त होने के खतरे में आ सकती हैं.
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