ईमान को बरकरार रखने वाला इंसान ही होता है चरित्रवान: पंकज जी महाराज

Pankaj Ji Maharaj: जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा का जनवरी को कासिमाबाद विकास खण्ड के ग्राम कटया लहंग पहुंचने पर भव्य स्वागत हुआ. जहाँ बुधवार को आयोजित सत्संग समारोह में सन्त पंकज जी ने अपने प्रवचन में कहा परमात्मा ने आप को मनुष्‍य शरीर देते समय कहा था तुमको मनुष्‍य शरीर इसलिये दिया जा रहा है कि अबकी बार जीते जी प्रभु की प्राप्ति करने वाले किसी सन्त महात्मा की तलाश करके अपनी जीवात्मा का कल्याण करा लेना. ऐसे महापुरुष जब धराधाम पर पधारते हैं तो वह अपना परिचय देते हुए कहते हैं ‘‘हम आये वहि देश से, जहां तुम्हारा धाम। तुमको घर पहुंचावना एक हमारो काम।।’’ वे कहते हैं जीवात्मायें सतनाम रूपी समुद्र की बूंद हैं उस समुद्र में इस बूंद को मिलाओ. यदि ऐसा न किया तो दुबारा यह मनुष्‍य शरीर नहीं मिलेगा.

महात्मा समझाते हैं वह परमात्मा है वह आप को मिलेगा, जीते जी मिलेगा. उन्होंने कहा हमारे गुरु महाराज परम संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने आत्मा-परमात्मा के गूढ़ ज्ञान को प्राप्त करने के लिये सबसे पहले जरूरी है कि आप मानव धर्म को और मानव कर्म को अपनायें. मानव धर्म क्या है-इन्सान, इन्सान के काम आये. एक-दूसरे की निःस्वार्थ भाव से सेवा करे. सत्य, दया, अहिंसा, परोपकार आदि गुणों को अपने जीवन में उतारें. लेकिन ये दुनिया की अवाम जन मानस विषय विकारों, शराबों, कबाबों, मांस मदिरा में सुख ढूढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. यह चरित्र पतन जैसे कार्यों को अपना कर ये जनमानस कैसे सुखी हो सकता है. इसलिये पहले अपने चरित्र जैसे धन को इक्ट्ठा करें. चरित्र ही मानव जीवन की पूंजी है. जो इंसान अपने एखलाक, ईमान को बरकरार रखता है वही इंसान चरित्रवान है.

ये दुनियाभर के लड़ाई-झगड़े पिता पुत्र में लड़ाई, आदमी औरत में लड़ाई, घर-परिवार में लड़ाई, मुल्क-मुल्क में लड़ाई, हे नर-नारियों! ये इन्सानों का काम नहीं, ये हैवानों का काम है. इसलिये सबसे पहले आप इन्सान बनो, महात्माओं के समीप आओ. वे जो भी दया का प्रसाद दें उसे लेकर अपने निज घर जाओ. जहां न फिर जन्मना है न मरना. इसीलिये हमारे गुरु महाराज ने आम जनमानस के बीच में आवाज लगाई है कि ऐ इन्सानों! तुम अपने दीन ईमान पर वापस आ जाओ और इस मनुष्‍य मन्दिर में बैठकर भगवान का सच्चा भजन करो. जिससे तुम्हारी जीवात्मा नर्कों में जाने से बच जाय. हम माने न माने सन्त महात्मा त्रिकालदर्शी होते हैं, वे सब कुछ जानते हैं, अगर हम उनके वचनों को मान लें तो बच जायेंगे, इसलिये अभी वक्त है उस मालिक से सच्ची प्रार्थना करने का, खुदा के सामने अपने गुनाहों की माफी मांगने का.

      महाराज जी ने कहा अशुद्ध खान-पान के कारण समाज में सामाजिक समरसता का प्रभाव घटता जा रहा है. जब गांव-गांव के लोग शकाहारी, सदाचारी व नशामुक्त हो जायेंगे, गांव-गांव के लोग जब भगवान का भजन करने लगेंगे, आपस के रगड़े-झगड़े खत्म हो जायेंगे तो रामराज, सतयुग आ जायेगा. उन्होंने सत्संग में आये सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और सभी के सुखद जीवन की मंगल कामना किया. शांति व्यवस्था में पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा.

      इस अवसर पर मनोज यादव, मनोज गुप्ता, मनबोध यादव, प्रभाचन्द मास्टर, सिद्धनाथ यादव, केशव यादव, अक्षय लाल, सुरेश गुप्ता, सहयोगी संगत बस्ती के रामउजागिर चौधरी, सन्तराम विश्‍वकर्मा, जगन्नाथ शर्मा आदि मौजूद रहे. कार्यक्रम के बाद धर्म यात्रा अगले पड़ाव सोनबरसा ब्लाक कासिमाबाद के लिये प्रस्थान कर गई. यहां आज दोपहर 12 बजे से सत्संग कार्यक्रम आयोजित है.

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