Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि श्री रामचरितमानस बालकाण्ड के प्रारम्भ वंदना प्रकरण में पूज्य गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज ने ९ दोहे में भगवान श्री राम के नाम की वंदना करते हैं। इसकी इतनी ज्यादा महिमा है, कहते हैं इसका पाठ करने से पूरी रामायण के पाठ करने का पुण्य फल मिलता है। प्रायः साधकों की इच्छा होती है कि – हमारी भगवान श्री सीताराम जी के नाम जप में रुचि बढ़े, ताकि हम अहर्निश नाम जप कर सकें और हमारा जीवन सफल हो। नाम वंदना प्रकरण का नित्य पाठ करने से सहज ही भगवान के नाम जप में रुचि बढ़ जाती है। इसलिए यह पाठ साधकों के लिए,नाम जापकों के लिए, अत्यन्त श्रेष्ठ है।
नाम वंदना के प्रारम्भ में राम नाम को ब्रह्मा,विष्णु,महेश का स्वरूप बताया गया है। भगवान का नाम – जापक के भीतर भक्ति,ज्ञान,वैराग्य को उत्पन्न करने वाला है। भगवान का नाम भक्ति,ज्ञान,वैराग्य को पुष्ट करने वाला है और जापक के सारे दुर्गुणों को समाप्त करने वाला है, इस अर्थ में भगवान का नाम ब्रह्मा,विष्णु,महेश का स्वरूप है। इस जगत के हेतु तीन है। अग्नि, सूर्य और चन्द्र। अग्नि, सूर्य और चन्द्र का परम हेतु भगवान का नाम है। जगत के कारणों का कारण भी भगवान का नाम है।
श्री राम नाम के प्रभाव से भगवान शिव काशी में शरीर त्याग करने वाले को मुक्ति प्रदान करते हैं। श्री राम नाम के प्रभाव से श्री गणेश जी प्रथम पूज्य हुये। श्री राम नाम के प्रभाव से महर्षि वाल्मीकि ब्रह्म स्वरूप बन गये। श्री भक्तमाल जी में श्री नाभा गोस्वामी जी भगवान के नाम की महिमा में कहते हैं। नाम महानिधि मंत्र, नाम ही सेवा पूजा। जप तप तीरथ नाम, नाम बिन और न दूजा।। समस्त धर्म शास्त्रों का प्राण वेद है और वेद का प्राण भगवान का नाम है। भगवान का नाम त्रिगुणातीत है, अनुपम है और समस्त शुभ गुणों का निधान है।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).