NMC notification 2026: देश में डॉक्टरों की कमी की बात अक्सर सुनने को मिलती है. हर साल लाखों छात्र नीट पास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों की वजह से बहुत से छात्रों का सपना अधूरा रह जाता है. इसके लिए सरकार ने मेडिकल एजुकेशन से जुड़े कुछ बड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे अब MBBS सीटों की संख्या बढ़ने की पूरी उम्मीद है. नए नियमों से न सिर्फ नए मेडिकल कॉलेज खोलना आसान होगा, बल्कि पुराने कॉलेज भी अपनी सीटें बढ़ा सकेंगे. यानी आने वाले समय में ज्यादा छात्रों को डॉक्टर बनने का मौका मिल सकता है.
छात्रों के लिए बड़ी राहत
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की अधिकतम सीमा 150 सीटों तक तय थी. यानी चाहे कॉलेज के पास बेहतर भवन हो, अस्पताल हो, स्टाफ हो, फिर भी वह 150 से ज्यादा सीटों के लिए आवेदन नहीं कर सकता था. अब यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई है.
पहले एक और शर्त थी कि 10 लाख की आबादी पर अधिकतम 100 एमबीबीएस सीटों की अनुमति होगी. यह नियम भी अब हटा दिया गया है. यानी अब सीटों की संख्या का किसी क्षेत्र की आबादी से सीधा संबंध नहीं रहेगा.
अस्पताल की दूरी का नियम बदला
पहले मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल के बीच यात्रा का समय 30 मिनट से ज्यादा नहीं होना चाहिए था. इस नियम के कारण कई संस्थान अटक जाते थे, क्योंकि ट्रैफिक या दूरी के कारण यह समय सीमा पूरी करना मुश्किल हो जाता था. अब इस नियम को बदलकर दूरी तय कर दी गई है. नए नियम के अनुसार, कॉलेज और अस्पताल के बीच अधिकतम 10 किलोमीटर की दूरी होनी चाहिए. वहीं पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए यह सीमा 15 किलोमीटर रखी गई है.
छात्रों के लिए क्या हैं इसके मायने?
सीटों में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर नीट यूजी कट-ऑफ (Cut-off) पर पड़ेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रतियोगिता का दबाव थोड़ा कम होगा और 550 से 600 अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए भी सरकारी कॉलेज में सीट सुरक्षित करने की संभावना बढ़ जाएगी. हालांकि, छात्रों को सलाह दी गई है कि वे काउंसलिंग प्रक्रिया और जोसा (JoSAA) या एमसीसी (MCC) के नियमों पर पैनी नजर रखें ताकि सीट अलॉटमेंट के समय किसी तकनीकी गलती से उनका साल बर्बाद न हो.
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