Universe: मानव सभ्यता जब से अस्तित्व में आई है तभी से उसका सपना दूसरे ग्रहों में भी जीवन बसाने का रहा है. वह सदियों से धरती जैसे किसी अन्य ग्रह की तलाश में जुटा हुआ है, जहां जीवन के निशान मिल सकें. पहले भी कई बार वैज्ञानिकों ने ऐसे ग्रह ढूंढ निकाले थे जो थोड़े बहुत पृथ्वी से मिलते-जुलते थे. अब खगोलविदों ने लाखों में एक ऐसी सुपर अर्थ (Super Earth) ढूंढ निकाली है जो असाधारण है.
पृथ्वी की तरह है ग्रह की बनावट
इन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने बताया कि आजतक लगभग 4000 एक्सोप्लॉनेट की खोज की गई है, जिनमें से अधिकतक पठारी हैं. हालांकि इनमें बहुत कम ही ऐसे हैं जिनकी ऑर्बिट पृथ्वी की तरह है. उन्होंने यह भी कहा कि यह ग्रह जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है उसका द्रव्यमान इतना कम है कि हम उसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं.
ग्रह की पहचान करने में लगे पांच दिन
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह ग्रह मिल्की वे के उस क्षेत्र में परिक्रमा कर रहा है जहां तारों की घनी आबादी है. इसलिए, भविष्य में संभव है कि यह ग्रह अपने तारे को छोड़कर किसी अन्य तारे की परिक्रमा करने लगे. इस ग्रह की खोज संबंधी पेपर लिखने वाली हेरेरा मॉर्टिन ने कहा कि कम रोशनी के कारण हमें इस तारे को ध्यान से देखने में हमारी टीम को पांच दिनों का समय लगा.
ऐसे किया ग्रह की पहचान
इतने दिनों तक तारे को ध्यान से देखने के बाद हमें यह ग्रह दिखाई दिया. लेकिन, पहले तो हमने यह समझा कि उपकरणों में खराबी के कारण हमें कुछ छोटे ग्रह की तरह दिखाई दे रहा है लेकिन, दोबारा जांच कर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यह अलग ग्रह है जो तारे की परिक्रमा कर रहा है.
इस ग्रह पर एक साल 617 दिनों के बराबर
उन्होंने बताया कि ग्रह जिस तारे की परिक्रमा करता है उसका द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान का 10 भाग ही है. जबकि ग्रह पृथ्वी और नेपच्यून के बीच है. हमारे सौरमंडल के अनुसार, इस ग्रह का ऑर्बिट पृथ्वी और शुक्र के बीच जितनी दूरी पर स्थित है. यहां एक साल धरती के 617 दिनों के बराबर है.
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