Makar sankranti 2025: इस बार मकर संक्रांति पर ऐसा संयोग बन गया है जिसने श्रद्धालुओं को कन्फ्यूजन में डाल दिया है. दरअसल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी है. शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है तो वहीं मकर संक्रांति पर चावल और दाल की खिचड़ी का सेवन जरूर किया जाता है. ऐसे में हर कोई इस चीज को लेकर कन्फ्यूजन में है कि इस दिन खिचड़ी का सेवन करें या नहीं. चलिए आपकी इस दुविधा को दूर करते हुए बताते हैं कि इस दिन क्या करना रहेगा सही.
मकर संक्रांति 2026 की तिथि
इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को हो रहा है, इसलिए मकर संक्रांति 2026 का पर्व 14 जनवरी, बुधवार को ही मनाया जाएगा.
मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान, जप और सूर्य पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
मकर संक्रांति 2026 शुभ समय
- पुण्यकाल: दोपहर 02:49 बजे से शाम 05:45 बजे तक
- महापुण्यकाल: दोपहर 02:49 बजे से 03:42 बजे तक
इस समय में गंगा स्नान, तिल-गुड़ का दान, वस्त्र दान और सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है.
मकर संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर (मकर राशि) में प्रवेश करते हैं. चूंकि शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन को पिता-पुत्र के पावन मिलन का पर्व भी माना जाता है. माना जाता है कि इस दिन सूर्य और शनि के संबंध सौहार्दपूर्ण हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में कर्म दोष, पितृ दोष और शनि दोष का प्रभाव कम होता है.
भगवान विष्णु की विजय से जुड़ी मान्यता
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, मकर संक्रांति का पर्व भगवान विष्णु की असुरों पर विजय का प्रतीक भी है. कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक में उत्पात मचाने वाले असुरों का संहार किया था और उनके सिरों को मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था.
मकर संक्रांति पर क्या करें?
- पवित्र नदी में स्नान करें
- सूर्य देव को अर्घ्य दें
- तिल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्र का दान करें
- जरूरतमंदों को भोजन कराएं
- बड़ों का आशीर्वाद लें
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